अन्य गतिविधियाँ
विद्यालय में बालकों के विकास हेतु विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित होती रहती हैं। बालकों की सक्रिय सहभागिता के अपेक्षित परिणाम प्राप्त होते रहे हैं।
- बौद्धिक प्रतियोगिताएँ:- चित्रकला, निबंध, भाषण आदि
- प्रश्न मंच प्रतियोगिताएँ:- सामान्य ज्ञान व भारतीय संस्कृति से सम्बिन्धित प्रतियोगिताएँ सम्पन्न होती हैं। प्रान्तीय स्तर पर भी छात्रों का चयन किया जाता है।
- स्थानीय प्रतियोगिताएँ:- चित्रकला, विज्ञान मॉडल, संगीत, वाद-विवाद, श्रुतिलेख, विचित्र वेशभूषा, एकाभिनय, मूकाभिनय, हिन्दी-अंग्रेजी सुलेख आदि साहित्यिक व संास्कृतिक प्रतियोगिताएँ सम्पन्न होती है।
- प्रयोगशालाएँ:-
छात्र सैद्धान्तिक एवं पुस्तकीय ज्ञान को व्यवहारिक रूप से हृदयगंम कर सकें, इस दृष्टि से भौतिक विज्ञान (वृहद् एवं लघु), रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व भूगोल की पृथक-पृथक चार हवादार प्रयोगशालाएँ हैं। प्रयोगशालाएँ उन्नत व नवीनतम उपकरणों से सुसज्जित हैं। प्रत्येक प्रयोगशाला में एक साथ 30 छात्रों के प्रयोग व अध्ययन की व्यवस्था है। आचार्य व प्रयोगशाला सहायक के निर्देशन में निर्धारित छात्र समूह प्रयोग करके विषयगत व्यवहारिक ज्ञान अर्जित करते हैं।
- पुस्तकालय:-
हमारे यहाँ 15773 पुस्तकों से सुसज्जित पुस्तकालय एवं वाचनालय की सुविधा उपलब्ध है। वाचनालय में 6 दैनिक समाचार पत्र, 7 साप्ताहिक पत्रिकाएँ, 4 पाक्षिक, 21 मासिक, 2 त्रैमासिक व 2 अर्द्धवार्षिक पत्र-पत्रिकाएँ नियमित रूप से उपलब्ध रहती है। जरूरतमंद बालकों को एक वर्ष के लिए बुक बैंक से पुस्तके दी जाती हैं। वर्तमान में बुक बैंक में 1725 विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध हैं।
- खेलकूद
यह विद्यालय छात्रों को किताबी शिक्षा ही नहीं बल्कि भिन्न-भिन्न प्रकार के कार्यक्रम के द्वारा छात्रों में उत्साहपूर्ण गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना जाग्रत करता है तथा साहसिक गतिविधियों का अभ्यास भी कराया जाता है।
कुशल व प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा शारीरिक व खेलकूद प्रशिक्षण दिया जाता है। विद्यालय के विशाल खेल प्रांगण में विभिन्न खेलकूदों की गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं।
संकुशलः, जिलाशः, प्रान्तीय व अखिल भारतीय स्तरों पर खेलकूद प्रतियोगिताएँ अक्टूबर से दिसम्बर माह के समयान्तर पर आयोजित की जाती है।
- नेशनल कैडेट कोर
विद्यालय सत्र 2005-2006 में प्रथम राज. बटालियन, एन.सी.सी., जयपुर द्वारा विद्यालय को 50 कैडेट्स की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रथम वर्ष के लिए 25 कैडेट्स का चयन किया गया। द्वितीय वर्ष के लिए भी 25 कैडेट्स का चयन किया गया। इस ग्रुप में कक्षा नवमी व दशमी के छात्रों का चयन किया गया है। सत्र 2006-2007 प्रथम राज. बटालियन एन.सी.सी. जयपुर के तत्वाधान में फायंिरंग प्रतियोगिता में कई छात्रों ने बेस्ट फायरिंग का इनाम प्राप्त किया है। प्रत्येक रविवार को प्रातः 3 घण्टे इन कैडेट्स की परेड़ एन.सी.सी. अधिकारी द्वारा करवाई जाती है।
- टाईप एवं कम्प्यूटर शिक्षा
वर्तमान में कम्प्यूटर शिक्षा के व्यवाहारिक पक्ष से स्पष्ट है, भविष्य में कम्प्यूटर हमारी दैनिक आवश्यकताओं व समस्याओं के समाधान का प्रबल साधन सिद्ध होगा। इस दूरगामी आवश्यकताओं स्वीकार करते हुए विद्यालय में कक्षा तृतीय से अनिवार्य कम्प्यूटर शिक्षा की व्यवस्था है। उ.प्रा. व उ.मा. विद्यालय में पृथक पृथक कम्प्यूटर प्रयोगशालाएँ हैं, जिनमें क्रमशः 25 व 40 कम्प्यूटर हैं। कम्प्यूटर कार्यशैली को बढ़ाने के लिए टंकण विषय को ऐच्छिक विषय के रूप में रखा गया है।
- शिशु वाटिका
शिशु वर्ग में कक्षा द्वितीय तक अध्ययन की व्यवस्था है। शिशु वर्ग के बालकों को खेल खेल में शिक्षा दी जाती है, जो बस्ताविहीन शिक्षा के रूप हैं।
बालायु के संस्कारक्षम काल में सर्वांगीण विकास का माध्यम मात्र अक्षर ज्ञान ही नहीं हैं अपितु क्रियापूर्ण संस्कारों के माध्यम से सत्- असतत्, योग्य-अयोग्य, वंाछनीय-अवांछनीय, व्यवाहारिक-अव्यवाहारिक तथ्य को समझाने व श्रेष्ठ आदतों का विकास करना ही शिशु वाटिका का मूल उद्देश्य है। बालकों मे स्वच्छता, व्यवस्था प्रियता, अनुशासन, सहकारिता के खेल, गीत, कहानी, इन्द्रिय विकास, भ्रमण, देशदर्शन, सामूहिक भोजन व प्रार्थना आदि कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तित्व का विकास किया जाता है।
- छात्रावास व्यवस्था
आज मूल्य परक शिक्षा और संस्कारक्षम वातावरण दोनों की अत्यधिक आवश्यकता है। शहर में आधुनिकता की चकाचौंध से युक्त वातावरण में ऐसे छात्र जो गाँव से आकर पढ़ते हैं उनका दिग्भ्रमित होना आम बात हो गई है। इस 13-14 वर्ष की आयु में छात्र का विवेक जाग्रत नहीं हो पाता है। परिणामस्वरूप अपने लक्ष्य से भटक जाता है और शिक्षा दुर्लक्ष्य हो जाती है।
श्री गुरूजी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में एक छात्रावास प्रारम्भ करने पर विचार किया गया जहाँ छात्रों को शिक्षा के लिए योग्य निर्देशन, घर जैसा वातावरण और गुरूकुलों जैसे भारतीयता से परिपूर्ण संस्कार मिल सकें। दिनांक 5 जुलाई 2006 से 50 छात्रों के लिए छात्रावास का शुभारम्भ किया गया। जिसे सत्र 2007-2008 से बढ़ाकर 100 छात्रों के रहने योग्य बनाया गया। कुछ वर्षो में ही श्री गुरूजी छात्रावास अपनी पहचान बना चुका है।